आज सोचा तो

आज सोचा तो आँसू भर आए
मुद्दतें हो गईं मुस्कुराए

हर कदम पर उधर मुड़ के देखा 
उनकी महफ़िल से हम उठ तो आए

दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं 
याद इतना भी कोई न आए

रह गई ज़िंदगी दर्द बनके 
दर्द दिल में छुपाए छुपाए

Kaifi Aazmi

Tanhaai

har taraf har jagah beshumaar aadami
phir bhi tanahaaiyon kaa shikaar aadami

subah se shaam tak bojh dhotaa huaa
apani hi laash kaa khud mazaar aadami

har taraf bhaagate daudte raaste
har taraf aadami kaa shikaar aadami

roz jeetaa huaa roz martaa huaa
har nae din nayaa intazaar aadami

zindagi kaa muqaddar safar dar safar
aakhiri saans tak beqaraar aadami

Nida Fazli

gazal/ग़ज़ल

जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये
है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाये

तिश्नगी कुछ तो बुझे तिश्नालब-ए-ग़म की
इक नदी दर्द के शहरों में बहा दी जाये

दिल का वो हाल हुआ ऐ ग़म-ए-दौराँ के तले
जैसे इक लाश चट्टानों में दबा दी जाये

हम ने इंसानों के दुख दर्द का हल ढूँढ लिया
क्या बुरा है जो ये अफ़वाह उड़ा दी जाये

हम को गुज़री हुई सदियाँ तो न पहचानेंगी
आने वाले किसी लम्हे को सदा दी जाये

फूल बन जाती हैं दहके हुए शोलों की लवें
शर्त ये है के उन्हें ख़ूब हवा दी जाये

कम नहीं नशे में जाड़े की गुलाबी रातें
और अगर तेरी जवानी भी मिला दी जाये

हम से पूछो ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या है
चन्द लफ़्ज़ों में कोई आह छुपा दी जाये

waqt

पूछ न मुझसे दिल के फ़साने
इश्क़ की बातें इश्क़ ही जाने

वो दिन जब हम उन से मिले थे
दिल के नाज़ुक फूल खिले
मस्ती आँखें चूम रही थी
सारी दुनिया झूम रही
दो दिल थे वो भी दीवाने

वो दिन जब हम दूर हुये थे
दिल के शीशे चूर हुये थे
आई ख़िज़ाँ रंगीन चमन में
आग लगी जब दिल के बन में
आया न कोई आग बुझाने

कौन कहता है

कौन कहता है तुझे मैंने भुला रक्खा है
तेरी यादों को कलेजे से लगा रक्खा है

लब पे आहें भी नहीं आँख में आँसू भी नहीं
दिल ने हर राज़ मुहब्बत का छुपा रक्खा है

तूने जो दिल के अंधेरे में जलाया था कभी
वो दिया आज भी सीने में जला रक्खा है

देख जा आ के महकते हुये ज़ख़्मों की बहार
मैंने अब तक तेरे गुलशन को सजा रक्खा है
…………….

kaun kehta hai tujhe maine bhula rakhaa hai
terii yaado.n ko kaleje se lagaa rakhaa hai

lab pe aahe.n bhi nahin aankh mein aansu bhi nahin
dil ne har raaz muhabbat kaa chhupaa rakhaa hai

toone jo dil ke andhere mein jalaayaa thaa kabhi
vo diyaa aaj bhi seene mein jalaa rakhaa hai

dekh jaa aake mehakte huye zakhmon ki bahaar
maine ab tak tere gulashan ko sajaa rakhaa hai

Tassavur

“Tu har pal hota mere saath hai … Meri saanso mein teri bas hai  Tanhaai mein Jo band ki aankhe … Lagaa tu kahin aas paas hai ” d
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dasht-e-tanhaai mein ai jaan-e-jahaa.n larzaa.n hai.n
terii aavaaz ke saaye tere ho.ntho.n ke saraab
dasht-e-tanhaai mein doori ke Khas-o-Khaak tale
khil rahe hai.n tere pehloo ke saman aur gulaab

uth rahi hai kahi.n qurbat se teri saa.ns kee aa.nch
apni Khushbu mein sulagti hui maddham maddham
door ufaq par chamakati hui qatraa qatraa
gir rahi hai teri dil_daar nazar kee shabnam

is qadar pyaar se ai jaan-e jahaa.n rakkhaa hai
dil ke rukhsaar pe is vaqt teri yaad ne haath
yoo.n gumaa.n hotaa hai garche hai abhi subah-e-firaaq
dhal gayaa hijr kaa din aa bhi gai vasl kee raat

तुम ये कैसे जुदा हो गये

तुम ये कैसे जुदा हो गये
हर तरफ़ हर जगह हो गये

अपना चेहरा न बदला गया
आईने से ख़फ़ा हो गये

जाने वाले गये भी कहाँ
चाँद सूरज घटा हो गये

बेवफ़ा तो न वो थे न हम
यूँ हुआ बस जुदा हो गये

आदमी बनना आसाँ न था
शेख़ जी आप हो गये

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